बुधवार 21 जनवरी 2026 - 18:09
हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम कितनी अवधि तक मछली के पेट मे रहे?

हौज़ा / हज़रत यूनुस की कहानी एक ऐसी अध्यात्मिक यात्रा की कहानी है जो अल्लाह के संदेश से आरम्भ होकर एक अचम्भित परिक्षा तक पहुंचती है, जो ईमान, पश्चातप और अल्लाह की हिकमत के गहरे हक़ाइक़ को व्यक्त करती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अल्लाह के चयनित नबी हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम का जीवन ईमान और तस्लीम की अज़ीम दास्तान है। आपके जीवन की वह घटना जो उम्मतो के लिए सदैव सीख और नसीहत का सामान बना, इस लेख मे आपके जीवन और परिक्षा पर संक्षिप्त प्रकाश डालेंगे।

हज़रत यूनुस अलैहिस सलामः अल्लाह की हिकमतो से भरी हुई कहानीः

अल्लाह के च्यनित पैग़म्बर हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम को इतिहास के अत्यंत अचम्भित परिक्षाओ मे से एक से गुज़रना पड़ा। जब आपको अल्लाह तआला की ओर से अपनी क़ौम के मार्गदर्शन का कर्तव्य सौंपा गया तो क़ौम की अवज्ञा देख कर आपने वहा से चले जाने का निर्णय किया।

लेकिन अल्लाह तआला, जिसके बुद्धिमत्ता असीमित है, ने अपने इस प्यारे पैग़म्बर के लिए एक अज़ीम घटना निहित कर दिया ताकि आपको ईमान और तस्लीम के एक उच्च स्थान पर फ़ाइज़ कर सकें।

कश्ती की यात्रा और समुद्र मे बड़ी परिक्षाः

हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम जब कश्ती मे सवार होकर समुद्र की यात्रा पर रवाना हुए तो अचनाक जबरदस्त तूफ़ान आया और एक विशाल मछली ने कश्ती को घेर लिया। यात्री इस घटना से घबरा गए और उसे अल्लाह की ओर से निशानी समझ कर अपने बीच किसी पापी को खोजने लगे।

हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम, जो स्वंय को अल्लाह के सामने कुसूर वार समझते थे, ने उनसे कहा कि मुझे समुद्र मे फेंक दो ताकि कश्ती इस खतरे से बच जाए। तीन बार क़ुरआ अंदाजी (ड्रा) किया गया हर बार हज़रत यूनुस ही का नाम निकला। अंतः उन्हे समुद्र मे फेक दिया गया जहा अल्लाह के आदेश से एक बहुत बड़ी मछली ने उन्हे निगल लिया।

लेकिन यह निगलना हलाकत के लिए नही था, बल्कि अल्लाह ने आदेश दिया था ना उसकी कोई हड्डी तोड़ना और ना उसके शरीर को कोई हानि पहुंचाना। यह घटना अल्लाह तआला की असीमित शक्ति और रहमत का स्पष्ट प्रमाण है, उसी अल्लाह ने जिसने इब्राहीम अलैहिस सलाम के लिए आग को ठंडा और सलामत वाली बना दिया था।

मछली के पेट मे जीवन और अंधेरे मे इबादतः

 हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम मछली के पेट मे रात मे अंधेरो, समुद्र की गहराईयो और मछली के आंतरिक माहौल के बीच अल्लाह की इबादत और मुनाजात मे व्यस्त हो गए। अपने पूरे शरीर के साथ अल्लाह की बारगाह मे गिड़गिड़ाए और दिल की गहराईयो से यह दुआ पढ़ी  ला इलाहा इल्ला अंता सुब्हानका इन्नी कुंतो मिनज़ ज़ालेमीन (तेरे अलावा कोई माबूद नही, तू पाक है, निसंदेह मै ही अत्याचारीयो मे से था)

हज़रत यूनुस का मछली के पेट मे रहने की अवधि के संंबंध मे विभिन्न रिवायते मिलती हैः कुछ रिवायतो मे 9 घंटे बताई गई है, जबकि कुछ मे 40 दिन और रात का उल्लेख है।

लेकिन यह अवधि जो भी रही हो, यह एक बड़ी परिक्षा और इलाही चमत्कार का स्पष्ट प्रमाण है। वह अल्लाह जो अपने बंदो को अतयंत कठिन हालात मे भी सुरक्षित रखने की क्षमता रखता है, उसी ने यूनुस अलैहिस सलाम को इस अचम्भित क़ैद से निजात दी।

मछली के पेट से निजात और क़ौम की तरफ वापसीः

हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम की सच्ची दुआओ और पश्चाताप को अल्लाह तआला ने स्वीकार किया और मछली को आदेश दिया कि वह उन्हे किनारे पर उगल दे। इस कठिन परिक्षा से गुज़रने के बाद आपका शरीर अत्यधिक कमजोर हो चुका था, किंतु अल्लाह की कृपा और दया से आपको एक विशेष वृक्ष की छाया मे स्वास्थ नसीब हुआ।

अल्लाह तआला ने आपके लिए कद्दू की एक बेल उगाई जिसने आपको छाया प्रदान की और उसके फल से आपको भोजन प्राप्त हुआ, इस प्रकार आपकी खोई हुई शक्ति दुबारा प्राप्त हुई।

इस घटना के पश्चात जब हज़रत यूनुस अलैहिस सलाम अपनी क़ौम को ओर वापस पलटे तो इस बार क़ौम ने जो अल्लाह की निशानीया देख चुकी थी, आपके मार्गदर्शन पर ईमान ले आई।

इस से मिलने वाली सीखः

सच्चा पश्चाताप और दुआ प्रत्येक कठिनाई मे काम आती है, अल्लाह की कृपा और दया प्रत्येक कठिनाई के पश्चात आसानी लाता है, अल्लाह अपने सेवको की बहाली का प्रबंध करता है, कठिनाईयो के बाद सफलता आती है और दृढ़ रहने वालो को अल्लाह की मदद प्राप्त होती है।

स्रोतः वीकी फ़िक़्ह / पर्समान दानिशगाहियान

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